रिश्वत मामले में 18 दिनों से फरार थानेदार – हैड कांस्टेबल को अब तक क्यों नहीं पकड़ सकी एसीबी और पुलिस की टीम?
जिस पुलिस की अपराधियों को पकड़ने की ड्यूटी और जिम्मेदारी है। उसी महकमे के थानेदार और हैड कांस्टेबल को पकड़ने के लिए एसीबी और पुलिस की टीम बीते 18 दिनों से लगातार तलाश में जुटी हुई है। एसीबी के लिए इन दोनों ही आरोपियों को पकड़ना बेहद चुनौतिपूर्ण साबित हो रहा है। एसीबी और पुलिस ने अभी तक दोनों आरोपियों को पकड़ने के लिए क्या प्रयास किए और इनकी जांच आखिर कहां तक पहुंची। इस बारे में आला अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। इस बारे में कोई खुलकर कुछ बताने को तैयार नहीं।
4.50 लाख रुपए की रिश्वत के मामले में फतहनगर थानाधिकारी सुरेश मीणा और डबोक थाने के हैड कांस्टेबल महावीर प्रसाद फरार चल रहे हैं। एसीबी की टीम को अभी तक इनका कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। जानकारी अनुसार इस मामले में एसीबी की टीम ने पुलिस का भी सहयोग लिया है लेकिन बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि शातिर अपराधियों को पकड़ने वाली पुलिस अभी तक अपने ही विभाग के कर्मचारियों को क्यों नहीं ढूंढ पाई।
चुनाव ड्यूटी से ही फरार हुआ थानाधिकारी, बेटे के मोबाइल से लगी थी एसीबी कार्रवाई की भनक
जानकारी अनुसार रिश्वत का यह मामला विधानसभा चुनाव के मतदान से ठीक एक दिन पहले 24 नवंबर का है। जब फतहनगर थानाधिकारी सुरेशचंद मीणा मावली में चुनाव ड्यूटी में थे। ढील पक्की होने के बाद जब परिवादी 4.50 लाख रुपए रिश्वत लेकर फतहनगर पहुंचा। तब थानाधिकारी ने खुद के चुनाव में व्यस्त होने की बात कहकर अपने बेटे सौरभ को पैसे लेने भेज दिया था। बेटे सौरभ को इस पूरे मामले के बारे में खबर नहीं थी।
थानेदार के कहे अनुसार परिवादी द्वारा जैसे ही बेटे के हाथ में रिश्वत पैसे थामे गए। तभी एसीबी की टीम ने उसे ट्रेप कर लिया। इसी दौरान बेटे ने तुरंत अपने थानेदार पिता को फोन लगाकर खुद को पकड़े जाने की सूचना दी तो थानेदार को एसीबी की कार्रवाई की भनक लग गई। तभी चुनाव ड्यूटी से ही वह फरार हो गया था।
हैड कांस्टेबल ने कराई थी डील, थाने ने मांगी थी 8 लाख रुपए रिश्वत
उदयपुर के डबोक थाने में करीब 5 माह पहले एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसकी जांच फतहनगर थानाधिकारी सुरेशचंद मीणा को सौंपी गई थी। फिर डबोक थाने के हैड कांस्टेबल महावीर प्रसाद ने केस में कोई कार्रवाई नहीं करने को लेकर थानाधिकारी से 8 लाख रुपए की रिश्वत की डील पक्की कराई थी। इसके लिए मुकदमा दर्ज कराने वाले को लगातार परेशान किया जाता रहा।
इधर, परिवादी ने एसीबी में मामले की शिकायत कर दी। मतदान से एक दिन पहले 24 नंवबर को थानाधिकारी विधानसभा चुनाव ड्यूटी में थे। तभी परिवादी जब 4.50 लाख रुपए थानाधिकारी को देने के लिए थाने पहुंचा। तब थानाधिकारी ने खुद के बेटे सौरभ मीणा को पैसे लेने भेज दिया। तभी एसीबी की टीम ने थानाधिकारी के बेटे को ट्रेप करते हुए गिरफ्तार कर लिया।
सोर्स: DB
