5 हजार किमी दूर से मेनार पहुंचे 250 से ज्यादा प्रजाति के परिंदे, पहली बार कुरजां भी
सर्दियाें की शुरुआत हाेने के साथ ही बर्ड विलेज मेनार में 200 से ज्यादा प्रजातियों के मेहमान परिंदे पहुंच चुके हैं। ये परिंदे मंगाेलिया, साइबेरिया, रूस, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान समेत अन्य देशों से 5 हजार किमी तक का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं। अमूमन ये परिंदे नवंबर माह में मेनार आना शुरू करते हैं, लेकिन इस बार ये अक्टूबर से ही पहुंचना शुरू हो गए। ये पूरी सर्दियां यहीं बिताएंगे। मार्च और अप्रैल माह में इनकी वापसी शुरू हो जाएगी।
पक्षी प्रेमी दर्शन मेनारिया ने बताया कि मेनार में पहली बार डेमोसिल क्रेन (कुरजां) काे भी देखा गया है। डेमोसिल क्रेन काे प्रदेश में कुरजां के नाम से जाना जाता है। यह अमूमन पश्चिमी राजस्थान में नागौर जिले का रुख करते हैं। माना जा रहा है यह पक्षी अपने झुंड से बिछड़कर कॉमन क्रेन के साथ यहां आ गया।
साइबेरिया, रूस, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान जैसे देशों से आए पक्षी
मेनार में अभी पैरेग्रिन फाल्कन, इसेबलीन व्हीटर, डेजर्ट व्हीटर, ब्लैक हेडेड बंटिंग, रेड हेडेड बंटिंग, ग्रेटर फ्लेमिंगो, कॉमन क्रेन, व्हाइट येलो एवं ग्रे वेग्टेल्स, कॉमन पोचार्ड, यूरेशियन विजन, टफ्टेड डक, नॉर्दन शोवलर, ग्रीन विंग्ड टील, रडी शेल्डक, ग्रेलैग गीज, बार हेडेड गीज, मार्श हेरियर, स्टेप्पी ईगल, शॉर्ट टोड स्नेक ईगल, ग्रेट कॉर्मोरैंट, साइबेरियन स्टोनचेट, पाइड बुश चैट जैसे प्रवासी परिंदे देखे जा रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय पक्षियों में सफेद टिकड़ी, छोटी डुबडूबी, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब, कॉटन पिग्मी गूज, कॉम डक, स्पॉट बिल्ड डक, ओरिएंटल डार्टर, इंडियन कॉर्मोरेंट, स्केली ब्रेस्टेड मुनिया, पाइड किंगफिशर, पेंटेड स्टोर्क, ग्रे एंड पर्पल हेरोन, पेंटेड स्टार्क, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क आदि प्रजाति के पक्षी भी आए हुए हैं।
30 को यूएन भेजेंगे मेनार काे रामसर बनाने का प्रस्ताव
मेनार तालाब काे रामसर साइट बनाने की तैयारी जारी है। वन विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर वन एवं पर्यावरण विभाग दिल्ली काे भेज दिया है। इस प्रोजेक्ट को 30 नवंबर काे यूएन काे भेजा जाएगा। रामसर साइट घाेषित हाेने से इस क्षेत्र में इकाे टूरिज्म काे बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में नए राेजगार के साधन भी उपलब्ध हाेंगे। हाल ही में मेनार काे वेटलैंड घाेषित किया गया था।
