अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर बाल विवाह के बंधन से मुक्त हुई बालिकाओं के साथ आयुक्त मीणा ने किया पुस्तक का लोकार्पण
उदयपुर,विनोद कुमार रैगर । अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर सबसे बड़ा उपहार बालिकाओं को सुरक्षित बचपन जीने हेतु समाज का पूरा सहयोग देना है बाल विवाह समाज के लिए कलंक है यह न केवल बालिकाओं का बचपन बल्कि पूरे राष्ट्र का भविष्य प्रभावित करता है बाल विवाह मुक्त भारत हेतु सभी को मिलकर सामूहिक एवम् सतत् प्रयास करना होगा उक्त विचार जनजाति विकास विभाग, राजस्थान सरकार के आयुक्त ताराचंद मीणा ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में उदयपुर स्थित जनजाति विकास विभाग कार्यालय में सामाजिक कार्यकर्ता भुवन ऋभु द्वारा बाल विवाह की रोकथाम की दिशा में लिखी किताब “व्हेन चिल्ड्रेन, हैव चिल्ड्रेन” के लोकार्पण कार्यक्रम के पश्चात व्यक्त किए इस अवसर पर राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार के पूर्व सदस्य एवम् बाल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र पण्ड्या ने बाल अधिकारो के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रयासरत कार्यकर्ता और महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा की लड़ाई लड़ने वाले सुप्रीम कोर्ट के प्रखर अधिवक्ता भुवन ऋभु द्वारा महिलाओं एवं बच्चों के लिए इस पुस्तक के माध्यम से जो पहल की गई उसे सराहनीय बताते हुए शुभकामनाएँ दी डॉ. पण्ड्या ने बताया की भारत में बाल विवाह की मौजूदा दर 23.3 प्रतिशत है और यूनीसेफ का अनुमान है कि अगर पिछले दस साल से हुई प्रगति जारी रही तो 2050 तक जाकर भारत में बाल विवाह की दर घट कर छह प्रतिशत पर आ पाएगी यह एक परेशान करने वाला आंकड़ा है और इसका मतलब है कि 2023 से लेकर 2050 के बीच सात पीढ़ियों तक बाल विवाह का दंश बच्चों से उनका बचपन छीनता रहेगा बाल विवाह मुक्त समाज हेतु सभी को आगे आना होगा आज इस अवसर पर ज़िले की 2 बहादुर बालिकाए गीता, सीता (परिवर्तित नाम) जिन्होंने अपने बाल विवाह हो जाने के बाद स्थानीय स्वयं सेवी संगठन गायत्री सेवा संस्थान के माध्यम से उसे निरस्त / शून्य करवाया ने भी बाल विवाह रोकने का संदेश दिया आज इस अवसर पर उदयपुर बाल कल्याण समिति की कार्यकारी अध्यक्ष यशोदा पाणिया, सदस्य अंजना जोशी, संगीता राव, कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फ़ाउंडेशन, गायत्री सेवा संस्थान के प्रतिनिधि नितिन पालीवाल, आशीता जैन, पायल कनेरिया सहित बच्चों के लिए प्रयासरत संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे
