भगवान के चिन्तन करने से भगवान के दर्शन होते है – स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ,श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन , समापन में उमड़ा जनसैलाब,आज होगा मंदिरों निर्माण का भूमि पूजन

बाँसड़ा,कन्हेयालाल मेनारिया । मेवाड़ के तीर्थ स्थल पर मेवाड़ पारशर समाज द्वारा पाराशर ऋषि आश्रम चल रही सात दिवसीय भागवत् कथा का रविवार को धुमधाम से समापन हुआ। कथा को सुनने के लिये राजस्थान सहित अन्य प्रदेश से समाजजन कि भीड उमडी पड़ी। सोमवार को दो बजे पाराशर आश्रम मे नर्बदेश्वर महादेव , पाराशर , वेदव्यास , शुकदेव मुनि के मन्दिर का समाज भुमिपुजन कर आधारशिला रखी जायेगी। इससे पहले कथा के अन्तिम दिन जगतगुरु शंकराचार्य ज्ञानानन्द तीर्थ ने अपने मुखारविंद से बताया की भगवान के चिन्तन करने से भगवान के दर्शन होते है एवम कथा में कुबजा का उद्धार , धनुष तोडना , मल्लयुद्ध , कंस वध , महाराज उग्रसेन व माता पिता (देवकि , वसुदेव ) को जेल से रिहा करा उग्रसेन का राजतिलक , कृष्ण , बलराम का यज्ञोपवित संस्कार करा , शांदिपनी आश्रम मे शिक्षा के लिये भेजना , जरासंध युद्ध , नई द्वारका का निर्माण , उद्धव प्रसंग ,रुकमणी विवाह आदि का वृतान्त सुनाकर पुरा पांडाल धर्ममय हो गया वही कथा आयोजन कमेटी ने आश्रम बनाने वाले भामाशाहों का एकलवी व तिलक लगाकर सम्मान किया। कथा के अन्त मे महाआरती कर प्रसाद वितरण किया गया । समाजजनो ने भागवत् पोथी को अपने सिर पर बारी बारी से लेकर व जगतगुरु शंकराचार्य ज्ञानानन्द तीर्थ को उनके अस्थाई निवास पर ससम्मान विदा करने गये । शाम को महाप्रसादी का आयोजन हुआ।

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