मातृकुंडिया में पाराशर मेवाड़ द्वारा श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़े श्रद्धालु , दूर दराज से पहुंच रहे है समाजजन

जिस व्यक्ति ने भगवान को शतुष्ठ नही किया उसका जीवन व्यर्थ है – शंकराचार्य ज्ञानानंद तीर्थ

बाँसड़ा,कन्हेयालाल मेनारिया । मेवाड़ का तीर्थस्थल मातृकुंडिया में पाराशर मेवाड़ द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन पाराशर आश्रम में किया जा रहा है। कथा के दुसरे दिन जगतगुरु शंकराचार्य ज्ञानानन्द तीर्थ के मुखारविंद से कहा की मातृकुण्डिया मेवाड़ का तीर्थधाम बताया है ,यहा पर जल का महत्व हे , जल से जीवन आया , यहा पर स्नान करने पर पापो से मुक्ति मिलती है । कर्म के तीन भाग होते है ,सत, तम ,और रज ।शृष्ठी मे 84 लाख योनि होती है। ब्रह्मा से शृष्ठी कि उत्पत्ति हुई। जिस व्यक्ति ने भगवान को शतुष्ठ नही किया उसका जीवन व्यर्थ है । पुत्र को पिता कि आज्ञा का पालन करना चाहिये। कथा मे वराहवतार,नृसिंहावतार, विष्णु के द्वारपाल जय,विजय को श्राप देना आदि का वृतान्त सुनाया । इस दौरान कथावाचक ने ” अच्छे बेटे कर्म फल से ही मिलते है ” भजन गाकर पुरा पान्डाल धर्ममय हो गया। वही शाम को पाराशर आश्रम में म्यूजिकल ग्रुप द्वारा संगीतमय सुंदरकांड के पाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कथा मे राजसमंद , भीलवाड़ा , चितौड, उदयपुर , नीमच , गुजरात , अजमेर,जयपुर,मारवाड़ सहित कई जगहों से आये महिला और पुरूषों ने श्रीमद् भागवत कथा का लाभ लिया। साथ ही श्रद्धालुओ द्वारा श्री भागवत् पोथी की आरती की गई व प्रसाद वितरण किया गया। वही बाहर से आए अतिथियों का पाराशर समाज के पदाधिकारियों व सदस्यो ने फूल माला एवम मोठड़ा पहनाकर स्वागत किया।
फोटो :- 01 कथा का वाचन करते हुए कथावाचक
02 आरती करते हुए श्रद्धालु
फोटो कन्हैया लाल मेनारिया बाँसड़ा

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