फूलडोल महोत्सव में वृंदावन और बरसाना जैसी होली की धूम दिखी
उदयपुर । प्रख्यात कृष्ण का धाम श्री सांवलियाजी मंदिर में मंगलवार को फूलडोल महोत्सव के दौरान वृंदावन और बरसाना जैसी होली की धूम देखने को मिली है यहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान के साथ होली खेलने के लिए उमड़ पड़े। यहां जम कर गुलाल उड़ाया गया और भगवान तथा होली के भजनों पर श्रद्धालु जम कर झूमे। सुबह से ही श्रद्धालुओं के कृष्णधाम श्री सांवलियाजी में आने का क्रम शुरू हो गया, जो शाम तक चलता रहा। इस दौरान निकाले गए फूलडोल के जुलूस में हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।
जानकारी के अनुसार होली का दहन के अगले दिन धुलंडी के अवसर पर श्री सांवलिया जी मंदिर में फूलडोल महोत्सव मनाया जाता है। इस बार मंगलवार को सांवलियाजी मंदिर में फूलडोल महोत्सव मनाया गया। मंगलवार सुबह राजभोग आरती के बाद भगवान श्री सांवलिया सेठ की विशेष पूजा अर्चना की गई। बाद में भगवान के बाल स्वरूप विग्रह रुप को रजत बेवाण में विराजमान करवा कर मंदिर से बाहर लेकर आए। भगवान को विराजमान कराने के साथ ही भगवान सांवलिया सेठ के जयकारे लगे। मंदिर के अंदर और बाहर रंग बिरंगी गुलाल उड़ रही थी। होली के भजनों पर श्रद्धालु गुलाल उड़ाते हुए नाच रहे थे। बाद में चांदी के बेवाण को लकड़ी के रथ में विराजमान किया गया। बाद में उत्तरी दिशा वाले दरवाजे पर लेकर आए। इस दौरान यहां हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान की अगवानी की। ऐसे में पुलिस और मंदिर के सुरक्षाकर्मियों को भीड़ नियंत्रण करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ गई। वहीं रथ के आगे और पीछे सैंकड़ों को संख्या में श्रद्धालु नाचते हुवे चल रहे थे। फूलडोल जुलूस नगर में विभिन्न मार्गों से होते हुवे गुजरा। मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान के साथ जम कर फाग खेला। शाम करीब चार बजे फूलडोल यात्रा पुनः मंदिर पहुंच चार बजे समाप्त हुई। इस दौरान मंदिर बोर्ड के चेयरमैन भैरूलाल गुर्जर, सदस्य अशोक शर्मा, संजय मंडोवरा, शंभू सुथार, भैरूलाल सोनी के अलावा विधायक अर्जुनलाल जीनगर भी दर्शन के लिए पहुंचे इसके अलावा बड़ी संख्या में ग्रामवासी और हजारों की संख्या में पड़ोसी राज्य के श्रद्धालु मौजूद थे। डिप्टी धर्माराम, मंडफिया थानाधिकारी ओमसिंह मय जाप्ते के तथा पुलिस लाइन से भी तैनात किया अतिरिक्त पुलिस जाप्ता सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे हुवे थे।
झांकी और गैर नृत्य ने मोहा मन
इस बार फूलडोल महोत्सव को थोड़ा बड़ा स्वरूप दिया गया था। भगवान श्री सांवलिया सेठ के रथ के अलावा पहली बार झांकी को भी शामिल किया गया। साथ ही कलाकारों की और से गैर नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई, जो सभी के आकर्षण का केंद्र ही। परंपरागत वेशभूषा में कलाकार गैर नृत्य की प्रस्तुति दे रहे थे।
एक दशक में ही फूलडोल महोत्सव ने ले लिया बड़ा स्वरूप
जानकारी में सामने आया कि करीब एक दशक पूर्व तक फूलडोल महोत्सव के अंतर्गत श्री सांवलिया मंदिर में जुलूस रात को निकलता था। इसमें नाम मात्र के श्रद्धालु, कुछ ग्रामीण और मंदिर मंडल के कर्मचारी ही हुआ करते थे। लेकिन बाद में मंदिर बोर्ड के साथ ही कस्बेवासियों ने प्रशासन से चर्चा के बाद फूलडोल पर जुलूस रात के स्थान पर दिन में निकालना शुरू किया। दिन में जुलूस निकालने का असर यह हुआ कि हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लग गई। ऐसे में एक दशक में ही मेवाड़ संभाग का यह एक बड़ा आयोजन धुलंडी के अवसर पर होने लगा।
इस बार टूट गया श्रद्धालुओं का रिकार्ड
धुलंडी के दिन फूलडोल महोत्सव के रूप में हुवे आयोजन के तहत श्री सांवलिया मंदिर में श्रद्धालुओं के आने का एक बड़ा रिकॉर्ड बना है। एक दिन पूर्व ही फूलडोल महोत्सव का सानिध्य पाने के लिए श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो गया। आस-पास के कई कस्बों और गांवों से तो श्रद्धालु 1 दिन पूर्व ही पैदल रवाना हो गए थे। वही मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दुपहिया एवं चार पहिया वाहनों से भी पहुंचे। ऐसे में पूरे मंडफिया कस्बे में श्रद्धालुओं की चहल-पहल देखने को मिली है। कई परिवारों में रिश्तेदार भी फूलडोल मनाने और भगवान सांवलिया सेठ का दर्शन करने के लिए आए थे, जो अपने रिश्तेदारों के यहां पहुंचे। ऐसे में पूरे गांव में चहल-पहल देखने को मिली। इस बार फूलडोल के अवसर पर श्रद्धालुओं का नया रिकॉर्ड बना है। इससे पहले कभी फूलडोल के दिन इतनी संख्या में श्रद्धालु नहीं पहुंचे थे।
