कला के सतरँगी रंगों से सरोबार होगा गणगौर घाट

शहनाई की स्वरलहरियों में हिलोरे लेगा पिछोला

लोकगायकों के सुर,तबले की ताल,ढोलक की थाप और खड़ताल का संगम होगा गणगौर घाट

काव्य रस के सभी रंगों को बिखरेंगे मायड़ भाषा के हिताळु

कैनवास पर राजस्थानी रंग उकेरेंगे नन्हें चित्रकार

उदयपुर,नितेश पटेल । जिलों की नगरी उदयपुर आने वाले दिनों में देश विदेश से आने वाले सैलानियों,प्रवासी राजस्थानियों तथा आमजन के लिए राजस्थानी कला संस्कृति के मनमोहक संगम का आकर्षण केंद्र रहेगी यहाँ एक और पिछोला झील शहनाई की स्वरलहरियों में हिलोरे लेगी तो दूसरी और राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवियों के मिरा के भक्ति रस, वीरांगनाओं के वीर रस तथा श्रृंगार रस के काव्य पाठ से श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाएंगे।साथ ही जहाँ राजस्थानी परिवेश में सैकड़ो महिलाएं एकसाथ तलवार के साथ घुमर नृत्य करेगी तो प्रसिद्ध चित्रकार केनवास पर राजस्थान के सतरँगी रंग बिखेरते कलाकार नजर आएंगे तथा चित्रकारी के गुर सिखाएंगे।यह सब राजस्थानी भाषा की मान्यता तथा लोक संस्कृति के सरक्षंण के लिए राजस्थान साहित्य महोत्सव “आडावळ” में सतरँगी रंग बिखेरता नजर आएगा।

राजस्थान साहित्य महोत्सव “आडावळ” के निदेशक डॉ. शिवदान सिंह जोलावास ने बताया कि अंतराष्ट्रीयस्तर पर अपनी पहचान बना चुका “आडावळ” इस वर्ष 05 नवम्बर सायं 5 बजे गणगौर घाट पर सांस्कृतिक रंग में प्रारम्भ होकर 25 दिसम्बर 2022 तक पूरे राजस्थान में अलग अलग स्थानों जयपुर, बीकानेर आदि में आयोजित होगा।महोत्सव में राजस्थानी भाषा के सम्मान के साथ लोक विरासत,राग-रंग,लोक संगीत, नृत्य,तलवार घूमर,हेमाणी,कथा – कथेतर जैसी अनेक कलाओं का मनमोहक संगम देखने को मिलेगा।

निदेशक जोलावास ने बताया कि “आडावळ” 5 नवम्बर सायंकाल 5 बजे गणगौर घाट पर पारंपरिक लोक गायकी से प्रारम्भ होगा तथा उद्घाटन सत्र में सारेगामा विजेता गंगा कलावंत लोकधुनों पर अपनी आवाज का जादू बिखेरेगी एवं मांगणियार के सुर,तबले की ताल,ढोलक की थाप और खड़ताल के संगम पर का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।सैलानियों तथा शहरवासियों को उदयपुर में पहली बार राजस्थानी परिवेश में सजी-धजी सैकड़ो महिलाएं का लोकगायकों की धुन पर अद्भुत “तलवार घुमर”,चकरी,कालबेलिया नृत्य देखने का सुअवसर प्राप्त होगा तथा राजस्थानी कला के प्रसिद्ध चित्रकार कमलेश डांगी कैनवास पर लोक सँस्कृति का सजीव चित्रण करेंगे एवं बच्चों को चित्रकारी के गुर सिखाएंगे।महोत्सव की तैयारियों को संयोजक डॉ. सीमा चंपावत, सहसंयोजक डॉ डोली मोगरा,कु हेमेन्द्र सिंह दवाणा,राजेश्वरी राठोड,रेणु कुमावत,मनीष चौधरी,राहुल सिंह, दिनेश जैन,ललित गोयल के साथ अंतिम रूप दे रहे है।

राजस्थान साहित्य महोत्सव “आडावळ” के आयोजक “अमी” संस्थान की सचिव राजेश्वरी राठौड़ ने बताया कि उद्घाटन सत्र में राजस्थानी डिंगल साहित्य के कवि सम्मेलन की जाजम पर वीररस के ख्यातनाम कवि गिरीश विद्रोही,सोहन चौधरी चित्तौड़गढ़,राजेन्द्र स्वर्णकार बीकानेर, सपना व्यास जैसलमेर,मायड़ भाषा के प्रसिद्ध कवि प्रहलाद सिंह झोरड़ा नागौर,पुष्कर गुप्तेश्वर,हिम्मत सिंह उज्जवल,डॉ. प्रियंका भट्ट मारवाड़ी, ढारकी,बीकानेरी,मेवाड़ी,निमाड़ी, बाँगड़ी,ढूँढाड़ी,तोरावाटी,जैपुरी, शेखावटी में भक्ति रस,वीर रस,श्रृंगार रस,करुण रस की कविताओं का अनूठा संगम प्रस्तुत करेंगे।

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