साँवलिया जी में धूमधाम से मनाई जाएगी महर्षि गर्गाचार्य जयंती, उत्कृष्ट कार्य करने वाले बालक बालिकाओं का किया जाएगा सम्मान
चित्तौड़गढ़ जिले के साँवलिया जी मे 1सितंबर को महर्षि गर्गाचार्य जयंती बड़ी धूमधाम के साथ मनाई जाएगी। गर्ग ब्राहमण समाज के द्वारा साँवलिया म होटल रतन पैलेस में महर्षि गर्गाचार्य जयंती मनाई जाएगी। जहां गर्ग समाज के सभी समाज के सदस्य बुजुर्ग,महिला, युवा, बालक बालिका बढ़ चढ़ के भाग लेंगे।
भाद्रपद की शुल्क पक्ष की पंचमी 1 सितंबर 2022 के दिन गर्ग समाज के द्वारा महऋषि गर्गाचार्य जी की जयंती आसपास के गांवों के समाज के लोगों द्वारा प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर मनाई जाएगी।
महर्षि गर्गाचार्य ने भगवान श्री कृष्ण का नाम करण किया था और भगवान शिव का विवाह करवाया था । गर्गाचार्य महाराज की प्रतिमा के आगे दीप प्रज्ज्वलित कर हवन पूजन करने के साथ कार्यक्रम शुरु होगा वैदिक ऋषि गर्ग आंगिरस और भारद्वाज के वंशज 33 मंत्रकारों में श्रेष्ठ थे । गर्गवंशी लोग ब्राह्मण हैं । भारतवर्ष ऋषि मुनियों का स्थल रहा है । ऋषि मुनियों के द्वारा रचित वेद पुराण आदि ग्रंथ सदैव समस्त मानव जाति का मार्गदर्शन करते रहे है । ऋषि मुनियों द्वारा किये गए तप , जप , ज्ञान , विवेक , तेज आदि कृत्यों का यह मानव समाज सदैव ऋणी रहेगा । उनके प्रति श्रद्धा व निष्ठा भाव स्मरण रूप में ऋषि पंचमी मनाई मनाई जाती है । गर्ग सहिता नामक संस्कृत ग्रंथ के रचिता महर्षि गर्ग द्वापर युगीय के महान पुरोहित कहे जाते थे । आज उनके वंशज गर्ग ब्राह्मण समाज के नाम से जानें जाते है । भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि महर्षि गर्गाचार्य जी के अवतरण दिवस के रूप में विख्यात है । इसी दिन को ऋषि पंचमी पर्व भी मनाया जाता है । महर्षि गर्गाचार्य जी का जन्म अंगिरस गौत्र में हुआ । इनके पिता का नाम भुवमन्यु था , ये मुनि भरद्वाज जी के पौत्र व देवगुरु बृहस्पति जी के प्रपौत्र हुए । महर्षि गर्गाचार्य जी के प्रति श्रद्धाभाव व्यक्त करने का यह एक पवित्र दिन माना जाता है।
गर्गसमाज उदयपुर, चितौड़गढ़, भीलवाड़ा,प्रतापगढ़ जिला द्वारा 1सितंबर को महर्षि गर्गाचार्य की जयंती मेवाड़ का आस्था का धाम साँवलिया सेठ की नगरी (मंडफिया) में धूमधाम से मनाई जाएगी। यह स्थान एक साँवलिया जी के नाम से प्रसिद्ध है। गर्ग समाज के मनोहर लाल ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि गर्गाचार्य की मूर्ति पर सभी समाज बंधुओं द्वारा माल्यार्पण कर किया जाएगा।
इनपुट : कन्हैयालाल मेनारिया
