मावली सीबीईओ के विरुद्ध समर स्मृति फाउंडेशन प्रमुख नागदा ने पेश किया परिवाद
उदयपुर,(डीपी न्यूज) । जिले के मावली ब्लॉक में पदस्थापित मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार सुथार के द्वारा विभाग को झूठी जानकारी एवं गलत शपथ पत्र देकर पदोन्नति एवं उसके अनुसार वेतन प्राप्त करने का मामला गुरुवार को संज्ञान में आया, इस पर समर स्मृति फाउंडेशन के प्रमुख गौरव नागदा ने इस मामले में सीबीईओ के विरुद्ध संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा, उदयपुर संभाग को प्रतिवेदन पेश कर संज्ञेय अपराध की एफआईआर दर्ज करवाने और तत्काल विभागीय कार्यवाही प्रस्तावित कर निलंबित करने की मांग की है ।
प्रतिवेदन में बताया कि सुथार की प्रथम नियुक्ति वर्ष 1990 में हुई है। तब से अब तक एसीपी और ग्रेड-1 पदोन्नति का लाभ उनके द्वारा लिया गया है। जिसकी मुख्य पात्रता वर्ष 2002 के पश्चात् दो से अधिक सन्तान नहीं होने पर ही दी जा सकती है। सुथार द्वारा समय-समय पर अपनी पदोन्नतियाँ एवं वार्षिक विवरण में अपनी दो संतान होने का ही विवरण अपने घोषणा-पत्र में दिया है। इनके द्वारा राज्य सरकार से अनुचित लाभ लेने एवं अधिक भुगतान व पदोन्नतियाँ प्राप्त करने के लिए शिक्षा विभाग के कार्मिक विवरण पत्र में स्वंय की दो पुत्रियाँ का नाम दर्ज करवाया जबकि सीबीईओ की कुल तीन संतान है। जिसमें दो पुत्रियों के अतिरिक्त एक पुत्र उत्कर्ष सुथार (जन्म दिनांक 16.08.2006) भी हैं। इस बात को विभाग व राज्य सरकार से अनुचित लाभ लेने के लिए जानबुझकर छुपाया गया जिससे की राज्य सरकार को अंधेरे में रखकर अनुचित लाभ लिया जा सके।
आर जी एच एस में अपने परिवार के कुल 4 सदस्य नांमाकित किये है। जिसमें उनकी पत्नि, माता, पुत्री व पुत्र उत्कर्ष सुथार का नाम है। वहीं इसमें अपनी दुसरी पुत्री का नाम छुपाया गया है। दिनांक 25.07.2024 को कार्मिक विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ.7(1) कार्मिक/क-2/96 (33/01) दिनांक 20.06.2001 के क्रम में शिक्षा विभाग को प्रस्तुत शपथ-पत्र/घोषण-पत्र में अपनी दो पुत्रीयों को ही होना बताकर अपनी कुल दो संतान होना बताया है। सुथार ने सोच समझकर अपने तीन संतान होने का तथ्य छुपाकर फर्जी घोषणा पत्र के माध्यम से पदोन्नतियाँ प्राप्त कर राजकोष को हानि पहुँचाते हुऐ सरकार से मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पद पर रहते हुए मूल्य प्रतिभूति के रूप में गलत तरीके से वेतन व अन्य लाभ प्राप्त कर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पात्र लोगो एवं सरकार के साथ धोखाधड़ी व लोक सेवक के रूप में आपराधिक न्यास भंग करने का गंभीर संज्ञेय अपराध कारित किया है। जो कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5), 338, 335, 336(3), 340(2), 61(2) (पूर्ववर्ति भारतीय दण्ड संहिता की धाराएं 420, 409, 464, 467, 468, 471, 120बी) के अन्तर्गत एक गंभीर संज्ञेय आपराधिक कृत्य है।
गौरव नागदा ने कहा कि संयुक्त निदेशक को प्रतिवेदन देकर कंप्लायंस की है और 48 घंटे का समय दिया है कि विभाग इस मामले में उचित कार्यवाही करे अन्यथा फिर हम लोग एफआईआर स्वयं दर्ज करवाएंगे। इस व्यक्ति ने किसी योग्य व्यक्ति के अधिकारों का हनन किया ।
