एसटी को ओबीसी में बदलने का खेल, रावत सरनेम का फायदा उठाकर हड़प रहे जमीनें : उदयपुर सांसद रावत
उदयपुर,डीपी न्यूज नेटवर्क । सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने दक्षिण राजस्थान में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में बदलकर जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। सांसद रावत ने आरोप लगाया कि स्थानीय राजनेताओं व भूमाफिया के संरक्षण में ये खेल लंबे समय से चल रहा है। आदिवासी (भील) समाज से जुड़े गांवों में मुखियाओं को गमेती, पटेल, गड्डा और रावत की उपाधि (उपजाति) देने की पुरानी परंपरा है। रावत सरनेम जो कि ओबीसी वर्ग के लोगों द्वारा भी उपयोग में लिया जाता है, के बहाने से भील मीणा परिवारों को रावत लिखवाकर उन्हें ओबीसी दर्शाया जा रहा है। इसके बाद ऐसे आदिवासियों की जमीनों को भी औने-पौने दामों में खरीदा भी जा रहा है। इससे मूल आदिवासी परिवारों के राजनीतिक और आरक्षण जैसे अधिकार भी खत्म हो रहे हैं। सांसद रावत ने दावा किया है कि आेबीसी बनकर अपनी जमीनों को बेचने वाले आदिवासी रावत परिवारों से जुड़े पुराने राजस्व रिकॉर्ड टटोलने से स्पष्ट होता है कि रावत (एसटी) की पुरानी कई पीढ़ियां भील मीणा लिखती रही हैं।
सांसद रावत की ओर से मामले में राष्ट्रपति, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित अन्य संवैधानिक संस्थाओं को इस बारे में पत्र लिखकर सच सामने लाने की मांग की गई है। सांसद ने आरोप लगाया है कि एसटी आरक्षण का लाभ छीनने के लिए कांग्रेस सरकारों की ओर से इस तरह का विशेष अभियान यहां चलाया गया था। एसटी वर्ग के कुछ लोगों के भोलेपन का फायदा उठाते हुए भूमाफिया ने लिखवा लिया कि वे रावत हैं। इसी को आधार बनाते हुए बाद में उन्हें ओबीसी में शामिल किया गया।
सांसद रावत ने कहा कि उदयपुर एवं बांसवाड़ा संभाग में भील मीणा जनजातियों के लोग इस षड़यंत्र का शिकार हुए हैं। ऐसे मामलों में जहां एसटी को ओबीसी बताकर जमीनें खरीदी गई हैं, उन्हें फिर से संशोधित कर प्रभावित आदिवासियों को उनका हक लौटाया जाए। रावत उपनाम वाले जनजाति सदस्यों को भविष्य में ओबीसी की सूची में नहीं जोड़ा जाए। सांसद रावत ने कहा कि राजस्थान में रावत एक अनेकार्थी शब्द है। डॉ. गणेशलाल निनामा के शोध विषय जनजातिय लोक सांस्कृतिक परिभाषाओं के बदले आयाम में इसका विस्तृत विवरण है। सांसद का आरोप है कि ये कार्य पूर्व में कांग्रेस नेता गुलाब सिंह शक्तावत के समय से शुरू हुआ। जब वे राज्य सरकार में गृह मंत्री थे। तब उन्होंने राज्य सरकार से भीलों में परम्परागत रावत पदवी को रावत (अन्य पिछड़ा वर्ग) में जाति रूप में दर्ज कराने के संबंध मंे कुछ शासकीय आदेश भी जारी कराए थे।
