नाबालिग लड़की से दुष्कर्म साबित नहीं, आरोपी और गर्भपात करने वाली नर्स बरी,आईओ ने जांच में खामियां रखी
घासा थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और गर्भपात कराने के मामले में कोर्ट ने आरोपी युवक और नर्स को संदेह का लाभ देकर दोष मुक्त कर दिया। अनुसंधान अधिकारी ने जांच में खामियां रखी और अभियोजन पक्ष कोर्ट में पूरे सबूत पेश नहीं कर पाया। इस कारण दोनों रिहा हो गए।
पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट में बताया कि विजनवास, मावली निवासी डालचंद की एक साल की बेटी की मौत हो गई थी। उसने 12 दिनों तक घरेलू काम के लिए उनकी 17 साल की बेटी को बुलाया। आरोपी ने उससे दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। इसका पता सातवें माह में लगा तो आरोपी किशोरी को धमकाकर डबोक हाईवे स्थित किसी हॉस्पिटल में ले गया। वहां दरोली, डबोक निवासी नर्स साक्षी ने गर्भपात किया। सबूत भी मिटा दिए। पुलिस ने डालचंद और नर्स के खिलाफ केस दर्ज कर पिछले साल 11 अक्टूबर को चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष ने दोनों के खिलाफ 18 गवाह और 42 दस्तावेज पेश किए। फिर भी दुष्कर्म और अपहरण साबित नहीं कर सके। गर्भपात के बाद पुलिस को भ्रूण बरामद नहीं हुआ और इसमें काम लिए उपकरण भी जब्त नहीं किए गए।
पीड़िता प्रसव के दौरान यूरिन, प्रेग्नेंसी टेस्ट, सीरम, वीटा आदि की जांचों के लिए हॉस्पिटल गई थी, लेकिन इसके भी सबूत पेश नहीं किए गए। यह तक साबित नहीं हो पाया कि पीड़िता से कब-कब दुष्कर्म हुआ और किस क्लीनिक में गर्भपात हुआ। सात माह के गर्भ की भी पुष्टि नहीं हुई। पॉक्सो-2 कोर्ट के जज संजय कुमार भटनागर ने आरोपी व नर्स को दोषमुक्त कर दिया।
