ऋषभदेव में मुकुट सप्तमी पर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण महोत्सव मनाया

ऋषभदेव,डीपी न्यूज नेटवर्क । ऋषभदेव में चातुर्मास के लिए विराजित भारत गौरव राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर महाराज के सानिध्य में 23 वे तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण दिवस मोक्ष सप्तमी के रूप में बड़ी धूम धाम से मनाया गया ।

” जैन धर्म में 24 तीर्थंकर की परंपरा है तीर्थंकर स्वयं संसार से तिरते है एवम दूसरो जीवो को तिरा कर अपनी आत्मा का कल्याण करते हैं । आज के दिन ही पारसनाथ झारखंड राज्य के सम्मेद शिखर से मोक्ष पधारे थे। आचार्य पुलक सागर ने कहा कि वैदिक परंपरा में चौबीस अवतार होते है ,जो ऊपर से नीचे धरती पर अवतरित होकर जीवो का कल्याण करते जैन परम्परा में चौबीस तीर्थंकर होते हे जो नीचे से ऊपर की ओर जाकर जीवो का कल्याण करते है। आचार्य श्री ने कहा कि वैदिक धर्म ओर जैन धर्म एक रेल की दो पटरी के समान है एक के बिना दूसरे का अस्तित्व संभव नही है। सभी धर्मो में प्रभु को निराकार माना है जैन धर्म में भी सिद्ध परमेष्ठी निराकार होते हैं । सभी धर्मो एव सम्प्रदायों में झगडे आकार एवं पुजा पद्धती को लेकर है ,जबकी भगवान निराकार है । सभी धर्मो एवं सम्प्रदायों के लोगो से अपील की कि सभी शान्ती से अपने पुजा पद्धती से भगवान की पूजा करे और सच्चे मन से भगवान का स्मरण करे।  – आचार्य श्री पुलक सागर महाराज “

दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार जैन ने बताया कि गुरुकुल मंदिर से इंद्र इंद्राणी ने 24 तीर्थंकरों भगवान को पालकी में विराजित कर शोभा यात्रा निकाली गई। भग़वान पारसनाथ की पालकी का पुण्यर्जन नरेंद्र कुमार किकावत परिवार को को मिला। पूरा नगर जयकारों से गूंज उठा । शोभायात्रा में महावीर विद्या मंदिर के बालको ने मधुर स्वरलहरी से बैंड बाजा बजाया। शोभा यात्रा नगर के मुख्य मार्गो से गुजरती हुई बस स्टैंड पंडाल में पहुंची जहा पर सम्मेद शिखर की रचना की गई जिसका अनावरण जोधपुर निवासी महावीर बागरेचा ने कर सम्मेद शिखर के दर्शन कराए। सभी शिखरों पर भगवान विराजित कर अभिषेक कर शांति धारा की गई। सभी इंद्र इंद्राणी ने पारसनाथ की पूजा कर निर्वाण लड्डू चढ़ाया । पारसनाथ टोंक पर 23 किलो का लड्डू चढ़ाने का लाभ नगर सेठ राजमल कोठारी परिवार को मिला। आज कलश स्थापना राजेंद्र प्रसाद कोठारी परिवार ने की। इस अवसर पर खेरवाड़ा, उदयपुर, झाड़ोल, डूंगरपुर, परसाद, चावंड, जयपुर, छाणी से कई समाज जन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री प्रदीप कुमार जैन ने किया।

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