योजना विभाग, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय की ओर से एसडीजी- 2024 की रिपोर्ट जारी : उदयपुर में 1 लाख में से 42 महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार, 46% गर्भवती व 59% किशोरियों में खून की कमी, 26% बच्चे कुपोषित
प्रदेश के योजना विभाग, आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय की ओर से हाल में ही एसडीजी- 2024 की रिपोर्ट जारी हुई है। इसके अनुसार उदयपुर में प्रति एक लाख महिलाओं पर 42 महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। पिछले साल यह संख्या 30 थी। इसमें एक साल में 29.11% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। गंगानगर में सबसे ज्यादा 79 महिलाएं पीड़ित रहीं। जबकि, आदिवासी बहुल बांसवाड़ा में स्थिति बेहतर है। यहां ऐसी महिलाओं की संख्या 18 रही।
उदयपुर में 46% गर्भवती व 59% किशोरियों में खून की कमी पाई गई। वहीं 26% बच्चे कुपोषित मिले। प्रदेश में सबसे ज्यादा कुपाेषित बच्चे बारां (40.2%) में मिले हैं। इस मामले में सबसे अच्छी स्थिति सीकर की है, जहां महज 18.3% बच्चे कुपाषित मिले। बता दें कि एसडीजी ने 16 कैटेिरी में 95 सूचकांकों के आधार पर सतत विकास लक्ष्य का निर्धारण किया है। इसमें उदयपुर ने सुधार किया है। पिछले साल उदयपुर 25वें रैंक पर था, वहीं इस बार 12वें स्थान पर पहुंच गया है। जबकि, झुंझुनूं पहले स्थान पर और सीकर दूसरे स्थान पर रहा।
प्रदेश में परिवार संबंधी निर्णयों में 65% महिलाओं से ली जाती है राय, भीलवाड़ा टॉप
एसडीजी रिपाेर्ट के अनुसार प्रदेश की 65.8 प्रतिशत महिलाएं परिवार के निर्णयाें में शामिल हैं। सबसे ज्यादा 80.4 प्रतिशत महिलाओं काे यह अधिकार भीलवाड़ा जिले में मिली है। उदयपुर की 65.6% महिलाओं से परिवार के लाेग राय लेते हैं। राजधानी जयपुर में 72.2% महिलाओं से परिवार के लाेग राय लेते हैं। हालांकि जारी रिपाेर्ट में इस बात का उल्लेख नहीं है कि इससे पहले इनकी क्या स्थिति थी।
उदयपुर में 15 से 49 वर्ष तक की 62% महिलाएं ही शिक्षित, कोटा अव्वल
रिपाेर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं की साक्षरता दर 64.70 प्रतिशत है। पिछली रिपाेर्ट में भी लगभग इतनी ही महिलाएं शिक्षित थीं। कोचिंग सिटी काेटा महिला साक्षरता में भी अव्वल है। यहां सबसे ज्यादा 76.50 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित हैं। अदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिले की स्थिति सबसे खराब है। यहां मात्र 53.10 प्रतिशत महिलाएं ही शिक्षित हैं। जबकि उदयपुर में 15 से 49 आयु वर्ग में 62 प्रतिशत महिलाएं ही शिक्षित हैं। यानी उदयपुर प्रदेश के औसत साक्षरता दर से भी पीछे है।
अनाज का उत्पादन घटा, 331 किग्रा प्रति हेक्टेयर कम पैदावार
एसडीजी ने वर्ष 2024 में 3562.35 किग्रा प्रति हेक्टेयर अनाज के उत्पादन का लक्ष्य रखा था, लेकिन इस बार 2092.9 किग्रा प्रति हेक्टेयर ही पैदावार हुई है। पिछले साल राजस्थान में चावल, गेहूं जैसे अनाज का उत्पादन 2423.41 किग्रा प्रति हेक्टेयर था, जो पिछले साल से 331 किग्रा प्रति हेक्टेयर कम है। सबसे ज्यादा अनाज का उत्पादन काेटा में 4402.81 किग्रा प्रति हेक्टेयर हुआ। कुल छह जिले ऐसे रहे, जिन्हाेंने अपने लक्ष्य काे पूरा किया। उदयपुर में भी उत्पादन गिरा है। यहां पिछले साल 2264.71 किग्रा प्रति हेक्टेयर पैदावार हुई थी, जबकि इस बार 2091.67 किग्रा प्रति हेक्टेयर ही पैदावार हुई।
सतत विकास में उदयपुर 12वां, पिछले साल 25वें पायदान पर था
एसडीजी के सतत विकास लक्ष्य में झुंझुनूं ने पहला स्थान हासिल किया है। जबकि नागाैर काे दूसरा और सीकर काे तीसरा स्थान मिला है। पिछले साल की रिपाेर्ट देखें ताे 2023 में सीकर पहले स्थान पर था। दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमश: झुंझुनूं और नागाैर थे। मतलब टाॅप तीन में जाे जिले पिछले साल थे वही इस बार भी हैं।
हालांकि उदयपुर की रैंकिंग देखें ताे पिछले साल 25वें स्थान पर थे, जबकि इस बार 12वें पर पहुंच गया है। 2022 में उदयपुर 11वें और 2021 में 19वें स्थान पर था। एसडीजी ने जीराे भुखमरी, नो हंगर, गुड हेल्थ एंड वेल बिइंग, क्वालिटी एजुकेशन, जेंडर क्वैलिटी, क्लीन वाटर एंड सैनिटेशन, डिसेंट वर्क एंड इकोनॉमिक ग्रोथ, इंडस्ट्री इनोवेशन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, लाइफ एंड लैंड, पीस एंड जस्टिस जैसे 16 कैटेगरी के 95 सूचकांक पर जिलों के विकास का निर्धारण किया है। लेकिन, किसी भी कैटेगरी में उदयपुर ने पहला स्थान नहीं हासिल किया है।
Source : DB
