डुंगरपुर : लोकसभा चुनाव में कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा को पार्टी की गाइडलाइन की पालना नहीं करने पर कारण बताओ नोटिस जारी

कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधायक गणेश घोघरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी ने विधायक से सात दिन में जवाब मांगा है कि गाइड लाइन की पालना क्यों नहीं की गई। साथ ही नोटिस में कड़ा एक्शन लेने की बात भी कहीं गई है। इससे पहले कांग्रेस आलाकमान ने पूर्व विधायक अमीन खान और एक पूर्व पीसीसी सचिव को पार्टी से निकाला था।

नोटिस को लेकर स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि घोघरा को कांग्रेस पार्टी का प्रचार करने के कारण ही यह नोटिस भेजा गया है। नोटिस में यह सीधे तौर पर उल्लेख नहीं है, लेकिन कांग्रेस ने बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट पर भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) से गठबंधन किया था। इसके बावजूद विधायक घोघरा इस गठबंधन के खिलाफ थे, इसलिए वो गठबंधन के प्रत्याशी राजकुमार रोत के प्रचार से दूर रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने गठबंधन पर भी विरोध जताया था और इसे पार्टी के खिलाफ बताया था।

डोटासरा ने दिए एक्शन के संकेत

बीते दिनों डूंगरपुर आए प्रदेश प्रभारी और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने साफ कहा था कि प्रचार में शामिल नहीं होने वाले नेताओं के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने पार्टी की गाइड लाइन से अलग चलने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के संकेत दिए थे। यहीं कारण है कि मतदान के बाद कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

कांग्रेस का सिंबल लेकर विरोध में उतरे थे डामोर

बता दें कि लोकसभा सीट बांसवाड़ा-डूंगरपुर के लिए नामांकन वापसी के अंतिम दिन प्रदेश कांग्रेस आलाकमान ने बीएपी से गठबंधन कर लिया। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद डामोर ने नाम वापस नहीं लिया और उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सिंबल पर ही चुनाव लड़ा। हालांकि इसके बाद डामोर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

पूर्व विधायक और पूर्व पीसीसी सचिव को पार्टी से निकाला

कांग्रेस ने इससे पहले बाड़मेर के शिव से पूर्व विधायक अमीन खान और पूर्व पीसीसी सचिव बालेंदु शेखावत को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। शिव (बाड़मेर) के 5 बार के विधायक अमीन खान पर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी उम्मेदाराम बेनीवाल का विरोध करने और निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र सिंह भाटी के पक्ष में बयान देने का आरोप था। वहीं बालेंदु शेखावत पर आरोप है कि वे जालोर- सिरोही में पार्टी के खिलाफ काम कर रहे थे। शुक्रवार को वोटिंग खत्म होते ही कांग्रेस ने दोनों नेताओं को पार्टी से निकाल दिया था।

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