रुण्डेड़ा के ग्रामीण पहुँचे मेनार, देखी अफीम फसल, डोडो से कैसे दूध आता है जाना

बांसडा, कन्हैयालाल मेनारिया । उपखंड क्षेत्र के कई गांवो में बहुमूल्य फसल काला सोना कही जाने वाली अफीम फसल की बुवाई की जाती है। क्षेत्र के मेनार में नारकोटिक्स विभाग द्वारा वर्ष 2023-24 में 92 लाइसेंस जारी किए गए, जिनमें 12 पट्टे सीपीएस पद्धति के जारी हुए। मेनार में दो भागों के हिसाब से विभाग द्वारा दो मुखिया दयाशंकर रामावत व पुरुषोत्तम दावोत को नियुक्त किए गए।

मंगलवार सुबह क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुण्डेड़ा से ग्रामीण मेनार अफीम काश्तकार जगदीश प्रसाद दियावत के खेत पर पहुँचे और अफीम फसल से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। डोडो से कैसे अफीम को लिया जाता है, किस तरह डोडो को चीरा लगाया जाता है, किस तरह छोटे बच्चे की तरह इसकी सुरक्षा की जाती है को जाना। किसान जगदीश प्रसाद ने बताया कि अफीम की बुवाई ठंड में की जाती है। अक्टूबर से नवंबर के बीच इसकी बुआई की जाती है। इसके लिए खेत का साफ किया जाना जरूरी है। खेत को 3 से 4 बार अच्छे से जोतकर गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डाली जाती है। नीलगाय, जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए तारबंदी की जाती है। 4 महीने तक इस फसल को छोटे बच्चे की तरह पालना करनी होती है।

दियावत ने बताया कि अफीम की बुवाई के 100-110 दिन बाद इसके पौधों में फूल आने लगते हैं। इन फूलों के झड़ने के बाद उसमें डोडे लग जाते हैं। अफीम की हार्वेस्टिंग रोज थोड़ी-थोड़ी की जाती है। इसके लिए इन डोडों पर चीरा लगाकर रात भर के लिए छोड़ दिया जाता है और अगले दिन सुबह उसमें से निकले तरल पदार्थ को इकठ्ठा कर लिया जाता है। जो अफीम विभाग में जमा करानी होती है। इस दौरान भेरुलाल जणवा, मांगीलाल जणवा, कन्हैयालाल मेनारिया, ओंकारलाल जणवा, भंवरलाल हरजोत, दुर्गाशंकर दियावत, प्रेमशंकर दियावत नरेश दियावत, प्रतापलाल, सहित अन्य मौजूद थे।

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