ड्राइवरों की हड़ताल से आमजन पर घूमा परेशानी का चक्का : ड्राइवरों की हड़ताल दूसरे दिन खत्म, इससे पहले लोगों पर दिखाई दिया असर, यातायात अटका
हिट एंड रन से जुड़ा नया कानून अभी लागू नहीं करने के आश्वासन के बाद ट्रक-बस सहित भारी वाहनों के ड्राइवरों ने भले ही काम पर लौटने की घोषणा कर दी है। लेकिन इनके दो दिन तक हड़ताल पर रहने का असर मंगलवार को आमजन पर भी दिखाई दिया। पेट्रोल-डीजल-सब्जी-सिलेंडर जैसी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हुई। जिले में 200 व शहर में करीब 40 पेट्रोल पंप हैं। इन पर 31 दिसंबर के बाद से सप्लाई नहीं हुई है। देर रात तक शहर में 10 और जिले में लगभग 15 पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म हो गया। उदयपुर आगार से रोज 340 बसें संचालित होती हैं। मंगलवार को करीब 100 बसें प्रभावित रहीं। बसों के पहिए थमे तो लोगों ने ट्रेनों का रुख किया। चित्तौड़गढ़, अहमदाबाद, जयपुर, कोटा व आसपास की लोकल ट्रेनों में यात्रीभार 30 फीसदी तक बढ़ गया।
उदयपुर व आसपास के इलाकों से होने वाली मार्बल की सप्लाई भी अटक गई है। छोटे-बड़े 300 लोडिंग वाहन नहीं जा पाए। चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजमल जैन के मुताबिक शहर में लगभग 80 से 90 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। शहर के करीब 2000 हजार ट्रक ड्राइवर भी हड़ताल में शामिल रहे। उदयपुर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मंगलवार को उदयपुर के सभी ऑटो-टैक्सी, टाटा मैजिक, एंबुलेंस यूनियनों की सामूहिक संघर्ष समिति ने नए कानून के विरोध में एडीएम प्रशासन शैलेश सुराणा को ज्ञापन सौंपा। प्रधानमंत्री के नाम दिए गए इस ज्ञापन में नए कानून को अविलंब वापस लेने की मांग की। संघर्ष समिति के प्रवक्ता मोहम्मद रफीक शाह बहादुर ने बताया कि सभी ट्रेड यूनियनों ने ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट यूनियन का आगामी निर्णयों में पूरा सहयोग करने का फैसला लिया है।
ईंधन : पेट्रोल-डीजल के लिए लंबी कतारें
शहर के अमूमन पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस गश्त करती रही। हजारेश्वर महादेव मंदिर के पास पंप पर कुछ युवकों ने कर्मचारी से नोजल छीन ली। हंगामे के बाद पंप बंद कर दिया गया। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश्वर जैन ने बताया कि आम ग्राहक भी 160 रुपए लीटर तक के प्रीमियम पेट्रोल-डीजल खरीदते हुए नजर आए। अगर हड़ताल वापस नहीं ली जाती तो बुधवार सुबह तक 50 प्रतिशत तक पंप सूखने के आसार रहते।
अनाज-सब्जी: आधी रही मंडियों में आवक
कई राज्यों से कृषि जिंस लेकर रोज 30 ट्रक सेक्टर-11 स्थित अनाज मंडी में पहुंचते हैं। मंडी प्रबंधन के अनुसार हड़ताल के दौरान 15 से 20 गाड़ियां ही आई। इनमें 1500 से 2000 बोरी गेहूं, दालें, चावल व अन्य खाद्य पदार्थ आते हैं। सब्जियाें की आवक भी 30% रह गई। मटर के भाव 25 से बढ़कर 60, टमाटर 20 से 30, नींबू 20 से 50, गाजर 20 की जगह 30 रु. किलो बिकी।
रोडवेज : कई मार्गों पर घंटों यात्री परेशान
उदयपुर से झाड़ोल, अंबाजी, फलासिया मार्ग पर दो दिन से बसें नहीं गई। मावली-कपासन होते हुए चित्तौडगढ़ जाने वाली 20 बसों का संचालन नहीं हुआ। यहां जाम भी रहा। इससे बाड़मेर, जालोर, आबुरोड और जोधपुर जाने वाली बसें भी समय से नहीं चली। मध्यप्रदेश जाने वाली सभी 5 बसेंं सिर्फ बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ तक ही संचालित हुई। धरियावद में देर शाम तक जाम रहा। हड़ताल के कारण यात्रीभार गिरकर 30 फीसदी ही रह गया।
एलपीजी : 5000 सिलेंडर ही पहुंचे
गैस एजेंसी यूनियन के सदस्य सुशील बापना ने बताया कि जिले में रोज 10 हजार सिलेंडर की खपत है। ये अजमेर, गुजरात, चित्तौड़गढ़ से आते हैं। हड़ताल के कारण मंगलवार को 5 हजार सिलेंडर ही पहुंचे। इससे कई घरों में सिलेंडर की सप्लाई नहीं हो सकी। दूसरी ओर, मार्बल की सप्लाई प्रभावित होने से मंगलवार को करीब 50 करोड़ का नुकसान हुआ।
